राजकीय महाविद्यालय आनी में कार्यशाला: कुल्लू के शैक्षणिक संस्थानों पर आपदा जोखिम पर चर्चा
जी आर भारद्वाज । आनी
राजकीय महाविद्यालय आनी स्थित हरिपुर की डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी ने एक प्रसार कार्यशाला आयोजित की। इसका आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० दायक राम ठाकुर के दिशानिर्देशन तथा महाविद्यालय की डिजास्टर मैनेजमेंट कमेंटी के संयोजक डॉ० जीतेन्द्र साहनी के कुशल नेतृत्व में किया गया। यह कार्यशाला हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) द्वारा प्रायोजित थी। इस कार्यशाला में परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं डीएमसी, एमएसहिपा, शिमला में सहायक प्राध्यापक डॉ० ख्याल चंद ने रिसोर्स पर्सन की भूमिका निभाई। कार्यशाला में डॉ० ख्याल चंद ने “शैक्षणिक संस्थानों और आपदा के बीच निकटता को समझने हेतु भू-स्थानिक विश्लेषण: कुल्लू ज़िला (हि.प्र.) के लिए आपदा न्यूनीकरण योजना का नया ढाँचा” शोध परियोजना के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए। अध्ययन में GIS के माध्यम से 1,228 स्कूलों का मानचित्रण किया गया और 238 शैक्षणिक संस्थानों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें कुल 13,337 विद्यार्थी पढ़ते हैं। अध्ययन के अनुसार सर्वेक्षित संस्थानों में से 40.3% किसी नाले, खड़ी ढलान या वन से 100 मीटर के भीतर स्थित हैं। लगभग 40% संस्थान पहले ही किसी आपदा का सामना कर चुके हैं, जिनमें 2023 और 2025 के भूस्खलन और बाढ़ प्रमुख हैं।
लगभग एक-तिहाई भवनों में भूकंप-रोधी व्यवस्था है, और केवल आधे संस्थानों में आपदा तैयारी में प्रशिक्षित स्टाफ है। अध्ययन में 69 संस्थानों को, जिनमें 2,977 विद्यार्थी पढ़ते हैं, उच्च या अति उच्च संवेदनशीलता श्रेणी में रखा गया है; आनी खंड का राजकीय प्राथमिक पाठशाला रोहरीधार ज़िले में सबसे अधिक संवेदनशील पाया गया। आनी और निरमंड में मुख्य जोखिम खड़ी ढलानें, कमज़ोर सुरक्षा दीवारें, अग्निशमन सेवाओं की अधिक दूरी और अनुसूचित जाति/जनजाति/बीपीएल परिवारों के विद्यार्थियों की अधिक संख्या पाए गए। प्रस्तावित ढाँचे में छह महीने के भीतर स्टाफ प्रशिक्षण, पूर्ण आपदा प्रबंधन योजना, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, ढलान संरक्षण, सुरक्षा दीवारों तथा भूकंपरोधी सुदृढ़ीकरण की सिफ़ारिश की गई है। अंत में डॉ० ख्याल चंद ने निष्कर्ष प्रस्तुत किए, और कार्यशाला में उपस्थित शिक्षक व गैर-शिक्षक कर्मचारियों, विद्यार्थियों और स्थानीय लोगों ने शैक्षणिक संस्थानों को सुरक्षित बनाने के उपायों पर चर्चा की। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० दायक राम ठाकुर ने अपने संदेश में रिसोर्स पर्सन डॉ० ख्याल चंद के शोधपरक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रस्तुत अध्ययन शैक्षणिक संस्थानों को आपदा जोखिम से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण, प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना तथा जन-जागरूकता के माध्यम से आपदाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट कमेटी के प्रयासों की भी सराहना की।









